हमारे शास्त्रों में ब्रह्मांडीय ऊर्जा और वनस्पतियों के बीच रहस्य पूर्ण संबंधों की विस्तार पूर्वक चर्चा की गई है। ब्रह्मांडीय ऊर्जा का एक केंद्र हमारे नवग्रह भी हैं, जिनका ज्योतिष में बड़ा विशद और महत्वपूर्ण विश्लेषण किया गया है। यहां हम सूर्य जिनको प्रत्यक्ष देव भी कहा जाता है, के श्वेतार्क या श्वेत मदार या श्वेत आक के पौधे से संबंध को निरूपित कर रहे हैं।

जब किसी की कुंडली में सूर्य कमजोर या विपरीत फल दे रहे हों तो वैसी स्थिति में सूर्य से शुभ फल पाने के लिए मदार के पौधे को किस ढंग से उपयोग किया जाए, इसके विषय में हमारे शास्त्रों में विशद विवरण मिलता है। सूर्य जब कमजोर होते हैं तो उस व्यक्ति को सामाजिक सम्मान, सफलता, समृद्धि, यश-ख्याति और सुंदर स्वास्थ्य आदि प्राप्त करने में कठिनाई होती है। साथ ही ऐसे जातक पितृ दोष से भी ग्रस्त हो जाते हैं। इस स्थिति में सूर्य को मजबूत करने के लिए विभिन्न उपायों के साथ-साथ एक उपाय यह भी बताया गया है कि मदार के पौधे का उपयोग किस ढंग से किया जाए कि सूर्य देव उस व्यक्ति को शुभ फल प्रदान करें।

श्वेत आक (Arka) और सूर्य देव” के साथ किए जाने वाले प्रयोगों को वैदिक, तांत्रिक और लौकिक उपायों के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है। ये प्रयोग विशेषतः तब किए जाते हैं जब कुंडली में सूर्य ग्रह पीड़ित, नीचस्थ, या अशुभ योग में हो।

यहाँ मैं आपको विशिष्ट प्रयोग (साधनात्मक, उपायात्मक और तांत्रिक) तीन स्तरों पर दे रहा हूँ –
श्वेत आक के साथ सूर्य प्रयोग

  1. 108 श्वेत आक पुष्पों से सूर्य अर्घ्य प्रयोग
  2. तांत्रिक अर्घ्य विधि
    रविवार को प्रातः सूर्योदय से पूर्व उठें। स्नान के बाद लाल वस्त्र पहनें। एक तांबे के लोटे में स्वच्छ जल, कुंकुम, सिंदूर, चावल, और श्वेत आक के 108 पुष्प डालें।

सूर्य को अर्घ्य देते समय मंत्र बोलें:

“ॐ घृणि सूर्याय नमः” (108 बार)

अर्घ्य अर्पण करते समय एक पैर उठाकर, सूर्य की ओर देखते हुए जल छोड़ें।
लाभ: आत्मबल, नेत्र तेज, सरकारी कार्यों में सफलता, सम्मान की पुनर्प्राप्ति। सूर्य पीड़ा (जैसे बुरा सूर्य दशा, नीच का सूर्य) दूर होती है।

  1. श्वेत आक की जड़ का ताबीज (रक्षा और बलवर्धन हेतु) बनाने की विधि:
    रविवार को सूर्योदय के समय आक के पौधे की जड़ को निकालें (दक्षिण दिशा की ओर झुकी हुई हो तो श्रेष्ठ है)। उसे गंगाजल से धोकर लाल कपड़े में लपेटें। ताम्र ताबीज में भरकर दाहिने हाथ में बाजू पर धारण करें या गले में पहनें। “ॐ सूर्याय नम:” – इस मंत्र से 21 बार जप कर ताबीज को अभिमंत्रित करें।
    लाभ:
    इसे पहनने से पीड़ित सूर्य की रक्षा होगी । निर्णय क्षमता में वृद्धि, आत्मविश्वास और प्रतिरोधक शक्ति का विकास होगा।
  2. श्वेत आक क्षीर (दूध) से सूर्य हवन प्रयोग (तांत्रिक साधना में प्रयोग)
    विधि: रविवार को सूर्य की दशा/अंतर दशा में आक के दूध की कुछ बूँदें हवन सामग्री में मिलाकर सूर्य मंत्र से आहुति दें :

हवन में श्वेत तिल, गुड़, आक के फूल, और गाय का घी मिलाएं।
लाभ: सूर्य की तांत्रिक हवन से अगर आप किसी विशेष राजनीतिक, प्रशासनिक या कानूनी संघर्ष से गुजर रहे हैं तो यह हवन विशेष फलदायक होता है।

मंत्र: “ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः।”

  1. श्वेत आक की माला से सूर्य मंत्र जाप
    आक की सूखी जड़ की माला (108 दाने) बनवा कर रविवार को सिद्ध करें। उससे “ॐ घृणि सूर्याय नमः” या “ॐ आदित्याय नमः” का 1080 जाप करें। इससे सूर्य बीज मंत्र की शक्ति कई गुना अधिक प्रभावी होती है।

सावधानियाँ: आक का पौधा विषैला होता है, प्रयोग करते समय औषधीय सावधानी बरतें।
आक को कभी भी बिना मंत्र के न तोड़ें। कहते हैं इससे दंड भी लग सकता है।

आक (अर्क) के पुष्प और पत्तियाँ तोड़ने का वैदिक तांत्रिक प्रयोग विशेष रूप से सूर्य, शिव, भैरव, बगलामुखी और तांत्रिक अनुष्ठानों में उपयोगी मानी जाती है। इसे तोड़ने से पहले मंत्रोच्चार आवश्यक होता है ताकि पौधे की ऊर्जा दोषरहित रूप से प्राप्त हो सके और उसकी औषधीय व आध्यात्मिक शक्ति बनी रहे। यहाँ प्रस्तुत है एक परंपरागत मंत्र, जो आक के पुष्प या पत्तियाँ तोड़ने से पूर्व बोला जाता है :

_”ॐ अर्काय नमः।
ॐ भास्कराय नमः।
ॐ ऊर्जाय नमः।
त्वं मे शक्तिं प्रयच्छ स्वाहा।”

अथवा एक वैकल्पिक लोकपरंपरा से लिया गया तांत्रिक प्रयोग-मंत्र :
“ॐ नमो अर्क वृक्षाय,
सप्तसप्तिर्वह्निरूपाय
,
सहस्त्रांशो महातेजः,
सर्वदोष विनाशकाय नमः।

यह पौधा शिव व सूर्य दोनों को प्रिय है, अतः आदरपूर्वक प्रयोग करें।
श्वेत आक सूर्य की तांत्रिक ऊर्जा का संवाहक पौधा है। यदि सही विधि, मंत्र और समय का पालन किया जाए तो इसके प्रयोग चमत्कारी प्रभाव दे सकते हैं।

उपयोग विधि: सुबह सूर्योदय से पहले या ठीक सूर्य की प्रथम किरण के समय, शुद्ध मन से यह मंत्र बोलते हुए आक के पुष्प या पत्ती तोड़नी चाहिए। मन में अनुग्रह भाव रखें, क्योंकि आक वृक्ष को तंत्रशास्त्र में जाग्रत माना गया है।
पुष्प/पत्ती तोड़ने के बाद उसे पृथ्वी पर न रखें — सीधे थाली या पवित्र स्थान पर रखें।

विशेष सावधानी: आक को बिना मंत्र या अनुमति के तोड़ना ऊर्जा विक्षोभ ला सकता है, विशेषकर यदि आप किसी तांत्रिक प्रयोग हेतु ले रहे हों

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