१. व्याघ्रपाद स्मृति में कहा गया है - "यज्ञं दानं जपो होमं स्वाध्यायं पितृतर्पणम्। नैकवस्त्रो द्विज: कुर्याद् भोजनं तु सुरार्चनम्।।" अर्थात् एक वस्त्र पहन कर न तो भोजन करना चाहिए,…
१. लघुहारीत स्मृति और नरसिंह पुराण में कहा गया है कि दूध वाले तथा कांटे वाले वृक्षों के दातुन का उपयोग व्यक्ति को यशस्वी बनाते हैं - "सर्वे कण्टकिन:…
१. वाधूलस्मृति में कहा गया है कि - "स्नानमूला: क्रिया: सर्वा: सन्ध्योपासनमेव च। स्नानाचारविहीनस्य सर्वा: स्यु: निष्फला: क्रिया:।।" यानी स्नान किए बिना जो पुण्य कर्म किया जाता है, वह निष्फल…
१. विष्णु पुराण में कहा गया है कि सदा पूर्व या दक्षिण की तरफ सिर करके सोना चाहिए। उत्तर या पश्चिम दिशा की तरफ सिर करके सोने से आयु क्षीण…
सनातन हिंदू धर्म और संस्कृति अद्वितीय, विलक्षण एवं अपरिमेय है। इसमें बताए गए सभी विधान, नियम, सिद्धांत, आचरण और व्यवहार न केवल मानव जाति को मानसिक एवं शारीरिक रूप से…
यहाँ पर अंतिम पंच महापुरुष योग के बारे में जानकारी देंगे। साथ ही यह भी बताएंगे कि यह योग किस तरह से भंग भी होता है....
शश योग जब शनि…
भद्र योग यदि बुध अपनी स्वराशि मिथुन या उच्च राशि कन्या में स्थित होकर केन्द्र में स्थित हो तो ‘भद्र’ योग बनता है। यह भी केंद्र में स्थित होकर लग्न…
किसी व्यक्ति की कंुडली में जो ग्रह स्थिति बनती है, उनसे कई तरह जरूरी और महत्वपूर्ण योग भी बनते हैं। इनमें कई योग राजयोग कारक होते हैं, जो संबंधित व्यक्ति…
बृहत्त पराशर होरा शास्त्र के अनुसार जन्मकुंडली में 14 प्रकार के शापित योग हो सकते हैं। इनमें पितृ दोष, मातृ दोष, भ्रातृ दोष, मातुल दोष, प्रेत दोष आदि को प्रमुख…
पितृदोष के प्रभाव और लक्षण
भारतीय ज्योतिष में कई तरह के दोष बताए गए हैं। इनमें पितृदोष को सबसे बड़ा दोष माना गया है। जिस व्यक्ति की कुंडली…
